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Department Of Sanskrit
संस्कृतविभागः

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DR.RAKESH SINGH RAWAT

ASSISTANT PROFESSOR

M.A., Ph.D.

यावद् भारतभूमिः स्यात् यावद् विन्ध्यहिमाचलौ।

यावद् गंगा च गोदा च तावदेव हि संस्कृतम् ।।

संस्कृत भाषा का भारतीय संस्कृति और साहित्य में बहुत महत्त्व है। इसे भारत की सबसे प्राचीन और पवित्र भाषाओं में से एक माना जाता है, यह कई भारतीय भाषाओं की जननी है, और इसका उपयोग धार्मिक ग्रंथों, साहित्यिक कार्यों और वैज्ञानिक विषयों में व्यापक रूप से किया है।

सम्पूर्ण विश्व में देवभूमि के नाम से विख्यात उत्तराखण्ड का सम्बन्ध देववाणी संस्कृत में प्राचीन काल से ही रहा है। वेद, उपनिषद्, रामायण, महाभारत, पुराण, धर्मस्मृतियाँ आदि हमारे सभी धर्म ग्रंथसंस्कृत भाषा में लिखे हुए हैं। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार 18 पुराणों की रचना महर्षि वेदव्यास ने उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के समीप माणा गाँव में की थी। यहाँ पर कविकुलगुरू महाकवि कालिदास का प्रारम्भिक जीवन उत्तराखण्ड की पहाड़ियों (कविल्ठा ग्राम रुद्रप्रयाग) पर बीता है इस विषय में सभी संस्कृत विद्वान एकमत हो रहे हैं। देवतात्मा हिमालय का सौन्दर्य एवं सुषमा उनके काव्यों एवं नाटकों में स्पष्ट परिलक्षित होता है। उत्तराखण्ड में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री पवित्र चार धर्मों सहित अनेक मठ एवं मंदिरों में नित्य पूजा-पाठ, भजन कीर्तन एवं प्रवचनादि संस्कृत भाषा में ही सम्पादित होते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि देवभूमि उत्तराखण्ड से ही संस्कृत ज्ञानगंगा धारा भारत भूमि को पवित्र करती हुई सम्पूर्ण विश्व में प्रवाहित हुई थी।

संक्षेप में, संस्कृत भाषा का महत्व धार्मिक साहित्यिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और भाषाई सभी स्तरों पर है। यह भाषा भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है और इसे संरक्षित करने और बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

 

सर्वे भवन्तु सुखिनः।सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्चन्तु। मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् ।।

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्ति ।।

SYLLABUS
पाठ्यक्रमः

SANSKRIT NOTES
संस्कृत टिप्पण्यः

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भारतीय राष्ट्रीय अंकीय ग्रन्थालयः (NDLI):
"भारतीय राष्ट्रीय अंकीय ग्रन्थालयः (NDLI) शिक्षणसंसाधनानाम् एकः आभासी कोषः (virtual repository) अस्ति, यः केवलं अन्वेषण-अन्वेषणसुविधाभिः युक्तः संग्रहः एव नास्ति, अपितु अध्येतृसमुदायाय अनेकाः सेवाः अपि प्रददाति। एतत् भारतसर्वकारस्य शिक्षा मन्त्रालयेन स्वस्य 'सूचना एवं सञ्चार प्रौद्योगिक्याः माध्यमेन शिक्षायां राष्ट्रियमिशन' (NMEICT) इत्यस्य अन्तर्गतं प्रायोजितं तथा च मार्गदर्शितं अस्तिA।"

ई-पीजी पाठशाला (e-PG Pathshala):
"ई-पीजी पाठशाला (e-PG Pathshala) भारतसर्वकारस्य मानवसंसाधनविकासमन्त्रालयस्य (MHRD - वर्तमानशिक्षामन्त्रालयस्य) एकः उपक्रमः अस्ति, यः सूचना एवं सञ्चारप्रौद्योगिक्याः माध्यमेन शिक्षायां राष्ट्रियमिशन (NME-ICT) इत्यस्य अन्तर्गतं विश्वविद्यालयअनुदानआयोगेन (UGC) क्रियान्वितः भवति।"

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